મારી કવિતા
Saturday, August 18, 2012
मेरा "दिल" एक आईने जैसा है
मेरा "दिल" एक आईने जैसा है,
जिसमे दिखाई देने वाला चहेरा सिर्फ आपका है,
तोड़ दोगे तो टूट जाएगा ये,
बिखर के रहे जाएगा अनगिनत टुकडो मै,
उस अनगिनत टुकडो मै भी दिखाई देने वाला हर चहेरा आप
का है.
संजय जोषी (अंजान)
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