મારી કવિતા
Saturday, August 18, 2012
सारां जहाँ है उसी का है
सारां जहाँ है उसी का है जो मुस्कुराना सीख ले,
रौशनी है उसी की है जो शमा जलाना सीख ले,
हर गली मै मंदिर है हर राह मै मस्जिद है,
पर सदगुरु उसीका है जो सर झुकाना सीख ले.
संजय जोषी (अंजान)
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