મારી કવિતા
Thursday, August 16, 2012
बेकरारी आपकी
बेकरारी आपकी तडपते रहे हम,
इन्ताझार आपका करते रहे हम,
हु मै आसपास ये अहेसास आपका उसे निभाते रहे हम,
लगालो तुम मुझे गले ये ख़याल आपका और उसके सपने देखते रहे
हम.
संजय जोषी (अंजान)
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